घोसी के टडियाव 100 बेड अस्पताल में सुविधाओं का टोटा ‍; एड.सतीश कुमार पांडेय

घोसी के टडियाव 100 बेड अस्पताल में सुविधाओं का टोटा ‍; एड.सतीश कुमार पांडेय

 रिपोर्ट - प्रेम शंकर पाण्डेय

यूपी सरकार से की गायनोलॉजिस्ट और सीटी स्कैन की मांग

घोसी/मऊ: तहसील के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम टडियाव में बना 100 बेड का आधुनिक अस्पताल इस समय केवल एक सुंदर इमारत बनकर रह गया है। करोड़ों की लागत से चमचमाती बिल्डिंग तो खड़ी कर दी गई है, लेकिन धरातल पर स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर स्थिति बेहद चिंताजनक है।

अस्पताल में मुख्य सुविधाओं की भारी कमी के कारण क्षेत्र के मरीजों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए एडवोकेट सतीश कुमार पांडेय ने उत्तर प्रदेश सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है और अस्पताल की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की पुरजोर मांग की है।

सुविधाओं के नाम पर 'जीरो' व्यवस्था

एडवोकेट सतीश कुमार पांडेय ने बताया कि टडियाव के इस 100 बेड वाले अस्पताल में सबसे ज्यादा जरूरत महिला मरीजों के लिए है, लेकिन यहाँ गायनोलॉजिस्ट (महिला रोग विशेषज्ञ) की कोई तैनाती नहीं है। इसके अलावा, गंभीर बीमारियों और एक्सीडेंटल केस में तुरंत जांच के लिए आवश्यक सीटी स्कैन (CT Scan) और अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) जैसी बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं भी नदारद हैं।

इतनी सुंदर और भव्य बिल्डिंग बनकर तैयार खड़ी है, लेकिन जब बात सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की आती है, तो यहाँ जमीनी हकीकत बिल्कुल जीरो है। अंतिम छोर पर बसे इस गांव के गरीब मरीजों को मामूली जांच और प्रसव के लिए भी मीलों दूर जिला अस्पताल या निजी सेंटरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग

एडवोकेट सतीश कुमार पाण्डेय पांडेय ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से मांग की है कि इस आधुनिक अस्पताल की उपयोगिता को समझते हुए यहाँ तत्काल प्रभाव से:

  विशेषज्ञ डॉक्टरों (विशेषकर गायनोलॉजिस्ट) की नियुक्ति की जाए।

  सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड मशीनों को इंस्टॉल कर उन्हें चालू किया जाए।

  पर्याप्त पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की जाए ताकि ग्रामीण जनता को इलाज के लिए भटकना न पड़े।

क्षेत्रीय जनता का भी कहना है कि अगर सरकार जल्द ही इन सुविधाओं को बहाल नहीं करती है, तो करोड़ों रुपये की यह आलीशान बिल्डिंग सिर्फ एक शो-पीस बनकर रह जाएगी।