विष्णु महापुराण कथा में हुआ शिव-पार्वती विवाह
रिपोर्ट - प्रेम शंकर पाण्डेय
शिव विवाह का प्रसंग सुनकर गूंजे बम-बम के जयकारे
कासिमाबाद (गाजीपुर) : स्थानीय गाँव पाली के शिव मंदिर परिसर में चल रहे श्री रूद्र महायज्ञ, श्री रामकथा एवं शिवपुराण कथा के सप्त दिवसीय आयोजन के अंतिम दिन गुरूवार को शिव महापुराण कथा में कथा वाचक पं. सुमित दास महाराज जी ने शिव-पार्वती विवाह का सचित्र प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि विवाह संस्कार पवित्र संस्कार है लेकिन आधुनिक समय में प्राणी संस्कारों से दूर भाग रहा है। जीव के बिना शरीर निरर्थक होता है ऐसे ही संस्कारों के बिना जीवन का कोई मूल्य नहीं होता। शिव पार्वती का विवाह केवल एक पारिवारिक या व्यक्तिगत मिलन नहीं था, बल्कि यह सृष्टि के दो महत्वपूर्ण तत्वों का संगम था।शिव पुराण में वर्णित इस कथा को सुनने और पढऩे से भक्तों को आध्यात्मिक प्रेरणा मिलती है।

यह कथा अटूट तपस्या, समर्पण और प्रेम का प्रतीक है, जहाँ कठोर तप के बाद पार्वती जी ने महादेव को पति रूप में पाया और एक अनोखी बारात के साथ उनका विवाह संपन्न हुआ।
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