हास परिहास : पढ़े फारसी बेंचे तेल
रिपोर्ट - प्रेम शंकर पाण्डेय
मशहूर मुहावरा है कि पढ़ें फ़ारसी बेचें तेल , यह देखो दुनिया के खेल । पहले इस मुहावरे की असलियत समझ में नहीं आती थी कि फ़ारसी पढ़ने से तेल बेचने का क्या ताल्लुक है लेकिन दुनिया के खेल देखकर इस मुहावरे की अहमियत (महत्ता) और अफ़ादियत (उपयोगिता) बल्कि फ़ज़ीलत (महिमा) समझ में आ रही है । अव्वल तो यह के पूरा ईरान फ़ारसी पढ़े होने के बावजूद अमेरिका उसे इस मुहावरे पर अमल नहीं करने दे रहा था । यह अमेरिका की बहुत भयानक ग़लती थी । फ़ारसी पढ़ने के बावजूद तेल बेचने न देना ईरान की खुली तौहीन थी । ईरान अगर हिन्दोस्तान होता तो कोई बात नहीं थी । अपनी फ़ारसी छोड़कर अमेरिका की अंग्रेज़ी पढ़ लेता और दूसरे ख़ूंख़ार देशों से रद्द किये हुए हथियार ख़रीदकर उन पर रंग रोग़न लगाने के कारख़ाने खोल लेता , मगर वह ईरान है । उसने तेल बेचने पर पाबंदी के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन्ज़ बनाने शुरू कर दिए । वह भी तेल से इतने सस्ते के उनके मार गिराने में अमेरिका और इज़राईल का तेल निकल गया । अब इस तेल के खेल में दुनिया में फ़ारसी क्यों पढ़ी जाती है इस पर दुनिया ने ग़ौर करना शुरू कर दिया है । अरब अरबी पढ़कर तेल बेच सकते हैं , रूस रुसी पढ़कर तेल बेच सकते हैं मगर पढ़ें फ़ारसी और फिर भी ईरान तेल न बेचे ये किस क़दर ज़ुल्म की बात है । अब जब ठीक से अमेरिका बहादुर ईरान से मार खा चुके और उनके समझ में आ गया कि किसी को उसके स्वभाविक क्रिया से रोकने का अंजाम क्या होता है तो उसने आजिज़ आकर ईरान को इजाज़त अता कर दी कि जनाब आप अपने अरमान पूरे करें और ख़ुदारा तेल बेच लें । लेकिन ईरान ने इनकार कर दिया कि हुज़ूर अभी बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले । तो पहले हमें अपने वर्षों के अरमान जी भर के निकाल लेने दें बाद में हम फ़ारसी दाँ लोग तेल तो बेचेंगे ही वह भी अपनी मर्जी से । हम वह नहीं है जो आपके कहने से कान पड़कर उठक बैठक शुरू कर दें , अभी तो हमें मिर्जा असदुल्लाह बेग ख़ाँ ग़ालिब की ग़ज़ल पूरी करनी है । हज़ारों ख़्वाहिश ऐसी तो पूरी हो रही हैं फिर भी अभी पूरी तरह पूरी नहीं हुई हैं । फिर इस शेर की तस्वीर भी देखना बाक़ी है कि निकलना ख़ुल्द (जन्नत) से आदम का सुनते आए हैं लेकिन , बड़े बे-आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले । और जब तक आप पूरी दुनिया में पूरी तरह ज़लील नहीं हो जाते हम आपको निकलने भी नहीं देंगे । एप्सटीन फ़ाइल से आप इतने बे-आबरू होकर नहीं निकले होंगे जितने हम आपको अपने कूचे से निकलने की कोशिश में कर देंगे ।
बेचें तेल , और बेचें । बेवक़ूफ़ कहीं के, मुहावरा था कि पढ़ें फ़ारसी बेचें तेल । यह थोड़े ही नहीं था कि पढ़ें अंग्रेज़ी बेचें तेल । देख लिया ना दुनिया का खेल ?
साभार
काजी फरीद आलम
पर्यावरणविद्द ,समीक्षक लेखक व सौहार्द फेलोशिप मेंटर
रूई मंड़ी ,गाजीपुर (उप्र).
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