"मनरेगा बचाओं यात्रा बनारस शहर पहुंची, बीएचयू छात्रों ने की अगुवाई

"मनरेगा बचाओं यात्रा बनारस शहर पहुंची, बीएचयू छात्रों ने की अगुवाई

रिपोर्ट - प्रेम शंकर पाण्डेय

मनरेगा को खत्म कर मजदूरों के अधिकारों पर हमला- रोशन

वाराणसी (उप्र).केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा में किए गए मजदूर-विरोधी बदलावों और नए कानून VB-G RAM G के विरोध में निकाली जा रही गांधीवादी युवाओं की ‘मनरेगा बचाओ यात्रा’ आज, सोमवार 16 फ़रवरी को बेलवा से शुरू होकर बड़ागांव, टिकरी खुर्द, भोपतपुर, हरहुआ, चांदमारी, भोजूबीर और कचहरी होते हुए बनारस शहर पहुँची। गांधीवादी युवाओं ने गाँव-गाँव जाकर आम लोगों से नए कानून VB-G RAM G के मजदूर-विरोधी प्रावधानों और काम के संवैधानिक अधिकार पर किए जा रहे सुनियोजित हमले पर चर्चा की तथा मनरेगा बहाली के लिए उन्हें संगठित किया।

17 जनवरी को चौरी-चौरा (गोरखपुर) से प्रारंभ हुई मनरेगा बचाओ साइकिल यात्रा गोरखपुर, देवरिया, बलिया, मऊ और गाजीपुर होते हुए बनारस पहुँची है, जहाँ 17 फ़रवरी को भारत माता मंदिर से निकलकर कचहरी स्थित अंबेडकर प्रतिमा पर एकदिवसीय उपवास के बाद इस यात्रा का समापन होगा।

यात्रा में शामिल पुष्कर पाल ने कहा, “सरकार मनरेगा जैसे जनहित के कानून को खत्म कर मजदूरों पर हमला कर रही है। यह गरीब, पिछड़े वर्ग, दलित, भूमिहीन मजदूरों और महिलाओं के सम्मानजनक रोजगार के रास्ते बंद कर देगा।”

बड़ागांव में महिला मजदूरों के साथ हुई बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता नीति ने कहा कि मनरेगा को मजदूरों के हित में मजबूत करने के बजाय सरकार ने रोजगार की गारंटी को ही खत्म कर दिया। VB-G RAM G सरकार की कोरी बयानबाज़ी को दर्शाता है। मजदूरों को उनके गांव में सम्मानजनक काम मिले और लोग मजबूरी में पलायन न करें।

यात्रा में शामिल इलाहाबाद विश्वविद्यालय की शोध छात्रा मृदुला मंगलम ने कहा कि मनरेगा कानून लागू होने के बाद महिलाएं पहली बार बड़ी संख्या में मुख्यधारा के काम से जुड़ीं। इससे वे आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त हुईं और उनकी ताकत में भी इज़ाफ़ा हुआ।

हरहुआ में BHU के शोध छात्र रोशन ने कहा कि मोदी सरकार पूँजीपतियों की सरकार है। एक तरफ उनके लाखों-करोड़ों रुपये के कर्ज माफ़ हो रहे हैं और कौड़ियों के भाव देश की सरकारी संपत्तियां उन्हें दी जा रही हैं, वहीं मनरेगा को खत्म कर मजदूरों के अधिकारों पर एक और हमला किया गया है।

BHU छात्र सुमन ने कहा, “हम विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र अपने देश को बचाने के लिए निकले हैं। देश को मजदूर, किसान और जवान बनाते हैं, और आज उन्हीं पर हमला हो रहा है।”

यात्रा की प्रमुख मांगें:

1. काम के संवैधानिक अधिकार को बहाल किया जाए।

2. मजदूर-विरोधी कानून VB-G RAM G को तुरंत वापस लिया जाए।

3. मनरेगा की न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन की जाए।

यात्रा में मुख्य रूप से मृदुला, नीति, रोशन, शांतनु, धनंजय, मृत्युंजय मौर्या, पुष्कर पाल, अमन यादव, सतीश साहनी, राजेश, अमन, प्रियेश, रजत, विवेक मिश्र, नीरज कुमार, विवेक यादव (मध्य प्रदेश), नजम शमीम, तौहीद बेग, सूफी सलीम, सुमन आनंद, गौरव पुरोहित (पश्चिम बंगाल), बृजेश साहनी, गौरव पांडेय, राशिद शेख (बेगूसराय), राजू कुमार (सहरसा), मुरारी कुमार (मुजफ्फरपुर), डॉ. शैलेंद्र कुमार (नवादा) आदि शामिल रहे।