अशुद्ध खान- पान को त्याग कर मानव धर्म कर्म का पालन करें - संत पंकज जी

अशुद्ध खान- पान को त्याग कर मानव धर्म कर्म का पालन करें - संत पंकज जी

रिपोर्ट - प्रेम शंकर पाण्डेय 

83 दिवसीय जयगुरूदेव जनजागरण यात्रा के तहत हुआ आध्यात्मिक वैचारिक सत्संग

संत पंकज जी को सुनने के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

 कासिमाबाद (गाजीपुर) 06 जन.। 83 दिवसीय जयगुरुदेव जनजागरण यात्रा के बत्तीसवें पड़ाव निकट क्षेत्र के ग्राम सुरवत में संस्थाध्यक्ष सन्त पंकज जी का आध्यात्मिक वैचारिक सत्संग हुआ। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा भाईयों-बहनों! जब हम इस संसार में पैदा हुये तो न कोई जाति या बिरादरी लेकर आये, न कोई मजहब लेकर आये, न कोई नाम लेकर आये सिर्फ नंगे रोते हुये पैदा हुये। बाद में जो अजार परमात्मा ने मन, बुद्धि, चित्त के बक्शे उससे हमारे अन्दर चेतना आ गई। हमारा नाम पड़ गया, कर्म के अनुसार हमारी जाति बन गई।खोटे-बुरे कर्मों को करने वाले जीवों को नर्कों में भयानक सजायें दी जा रही हैं। लाखों मील तक रोने चिल्लाने की आवाज जाती है। कोई बचाने वाला नहीं। सन्त महापुरुाष साधना करके जब ऊपर के लोकों में जाते हैं इस भयावह दृश्य को देखकर द्रवित हो जाते हैं। वे उससे बचने का सन्देश देते हैं। बताई गई साधना से आप लोग भी इसे देख सकते हैं। इसलिये अशुद्ध खान-पान को त्याग कर मानव धर्म-कर्म का पालन करें। मानव धर्म यह है कि इन्सान-इन्सान एक दूसरे के काम आये। निःस्वार्थ भाव से एक-दूसरे की सेवा करें। सत्य, दया, करुणा, अहिंसा के गुणों को अपनायें। इस प्रकार अपनी आत्मा का कल्याण करा लें। यही असली मानव धर्म है।

उन्होंने बताया 'जयगुरुदेव' समय का सिद्ध नाम है जिसे बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ने जगाया। इस नाम जहाज पर अगर दुनिया के सारे जीव बैठ जाय तो यह सबको पार कर देगा। जयगुरुदेव नाम के साथ यह संकल्प जुड़ा है कि "जन-जन की जबान पर जब जयगुरुदेव आयेगा, सच्ची स्वतंत्रता का तब आनन्द पायेगा

संस्थाध्यक्ष ने बताया कि मथुरा में आगरा-दिल्ली बाईपास पर वरदानी जयगुरुदेव नाम योग साधना मन्दिर बना है। आगामी 3 से 5 मार्च तक होली सत्संग मेले का आयोजन संस्था करेगी। आप लोग भी इस पावन अवसर पर पधारें। महाराज जी ने सभी आगन्तुकों का हार्दिक आभार व्यक्त किया तथा सुखमय भविष्य की मंगल कामना किया।

इस अवसर पर मनोज गुप्ता, खेदारू कुशवाहा, पूर्व प्रधान संतोष राय,अखिलेश राय, सुरेश गुप्ता, सौहार्द साथी प्रेमशंकर पाण्डेय, बंधुत्व मंच से जुड़े वीरेंद्र गुप्ता,तारकेश्वर यादव, शिंटू बाबा,प्रदीप यादव, राकेश विश्वकर्मा, उमेश विश्वकर्मा, मनजीत ठाकुर, दयानन्द चौरसिया, डा. तारकेश्वर तथा सहयोगी संगत बस्ती के रामउजागिर चौधरी, अर्जलाल मास्टर, मेंहीलाल चौधरी, संस्था के कई पदाधिकारीगण एवं प्रबन्ध समिति के सदस्य मौजूद रहे।